मेरे राम
तुमसे इक प्रश्न पुछूं मेरे रामतुमने स्वयं क्यों नहीं दी अग्निपरीक्षा.......तुम्हारी चलाई इस परंपरा मेंआज भी कितनी औरतों को देनी पड़ रही हैं अग्निपरीक्षाएं.....इतिहास दुहरा रहा है स्वयं कोअंतहीन-सीमाहीनतुम्हें कैसे मांफ कर दूंमेरे रामअरसा पहले इस कविता को...
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खंभा
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[01 May 2010 05:13 AM]



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