रावण के जन्म की कथा (2) - उत्तरकाण्ड (3)
अगस्त्य मुनि ने कथा को आगे बढ़ाया, "एक दिन हिमालय प्रदेश में भ्रमण करते हुये रावण ने ब्रह्मर्षि कुशध्वज की कन्या वेदवती को तपस्या करते देखा। वह उस पर मुग्ध हो गया और उसके पास आकर उसका परिचय तथा अविवाहित रहने का कारण पूछा। वेदवती ने अपने परिचय देने के...
[पूरी पोस्ट]
जी.के. अवधिया
15
1
0
1
2
[01 May 2010 05:18 AM]



Shuffle








