कब तक रोकोगे.... (कविता) (मई दिवस विशेष)
इतिहास की किताबों को जो मन में आये बक लेने दोअलां फलां चीज़ों के लिएअमुक चमुक को श्रेय देने दोपर...मेरा भी यकीन करोएक बात बतलाता हूँदिल्ली का लाल किलामैंने ही बनाया हैये और बात है किन मैं इसकी गद्दी पर कभी बैठाना इस पर झंडा फहराया हैमेरे नाम पर कोई मार्ग...
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मयंक
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[01 May 2010 04:10 AM]



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