हम मुस्लिम,हम हिन्दू ,हम अच्छे, तुम बुरे..(कितने शर्म की बात है की हमारे मध्य कुछ लोग शान से ऐसा कहते हैं )...अरशद अली

Arshad ke man se........ नकाबों में चेहरा छुपाये इन्सान अपने-अपने उम्र को गुज़ार रहा है...अनुभवों को जमा करते हुए ...सुधारते हुए अपने जीवन शैली को...बिडम्बना हीं है की जो भी अर्जित किया उसे आने वाले पीढ़ी को बाँट देना है और जो भी अर्जित नहीं हुआ उसे पा लेने के लिए एड़ी पर शारीर... [पूरी पोस्ट]
writer Arshad Ali
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[01 May 2010 03:33 AM]

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