लैंसडाउन....... फिर कभी :(
'जितेन, मेरी कार का शीशा फूट गया है, मैं नहीं जा सकूँगा!'विजय ने जैसे दो टूक फैसला सुना दिया।मैंने कहा--जाना तो सरबजीत के कार से है, तब तक के लिए तू अपने कार पर कवर चढाकर चल पड़!-नहीं, मेरा मूड ऑफ हो गया है! कल किसी बच्चे ने कुत्ता भगाने के चक्कर...
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जितेन्द़ भगत
सैलानी : एक सफर की कहानी
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[01 May 2010 03:23 AM]



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