भाई ये बातें सच्ची हैं

युग-विमर्श  (YUG -VIMARSH)   یگ ومرش भाई ये बातें सच्ची हैं।तहज़ीबें मिटती रहती हैं॥फूलों की ख़्वाहिश रखती हैं। आरज़ुएं शायद तितली हैं॥आसमान सर पर टूटा है,धरती की रूहें काँपी हैं॥सूरज तो बेहिस होता है, ख़्वाब ज़मीनें ही बुनती हैं॥चाँद की मिटटी छू कर देखो,लम्स की मुद्दत से प्यासी हैं॥दर्द... [पूरी पोस्ट]
writer युग-विमर्श
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[01 May 2010 01:37 AM]

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