तीसरा रास्ता...
मोदी, आई.पी.एल और फीलगुड पत्रकारिता का घना होता अँधेरा “पत्रकारिता का पहला नियम है: कोई भगवान नहीं होता है. और अगर कोई भगवान की तरह दिखता है तो आमतौर पर उसके पैर कीचड़ में सने होते हैं. कुछ यही हुआ, तेजतर्रार, सरपट बोलनेवाले एक ४६ वर्षीय व्यक्ति के साथ जो...
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आनंद प्रधान
मीडिया
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[01 May 2010 00:46 AM]



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