विदुर दर्शन-क्षमावन पुरुष की राह देवता भी देखते हैं (kshamavan purush aur devata)
अतिवादं न प्रवदेव वाद्येद् योऽनाहतः प्रतहन्यान्न घातयेत्।हन्तुं च यो नेच्छति पापकं वै तस्मै देखाः समुहयन्त्यागताय।।हिन्दी में भावार्थ-जो स्वयं किसी के प्रति बुरी बात न स्वयं कहता न दूसरे को कहने के लिये प्रेरित करता, बिना मार खाये किसी को नहीं मारता और न...
[पूरी पोस्ट]
दीपक भारतदीप
आध्यात्म
7
0
0
0
1
[30 Apr 2010 23:53 PM]



Shuffle







