भ्रष्टाचार एक कलंक है...
इस देश को क्या हो गया है पता नहीं। जो जहां है, ज्यादा कमाने के चक्कर में दुह रहा है। शर्म को बेचकर, अंतरात्मा को रौंदकर हर कोई ज्यादा कमाने की चाह रख रहा है। मेडिकल का क्षेत्र हो या कूटनीति का सब जगह इस कदर खुद से मुहब्बत का पागलपन सवार है कि देश को बेच...
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prabhat gopal
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[30 Apr 2010 22:34 PM]



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