पास दूर

स्वार्थ दूर होने की कसक पुल बन जाती है अक्सर दिलों को क़रीब लाने को पर अति निकटता के अहसासों की आँच जाने क्यों कभी कभी विलग कर देती है दिलों को मानो संबंधों की ऊष्मा से घबरा जाते हों मन... [पूरी पोस्ट]
writer swaarth

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[30 Apr 2010 20:07 PM]

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