कितना वह मजबूर था--श्रमिक दिवस पर विशेष
आज एक मई श्रमिक दिवस है, श्रम शील हाथों को समर्पित एक पुरानी रचना पेश कर रहा हुँ। आशा है कि आपको पसंद आएगी। दुनिया बनाई देखो उसने कितना वह मजबूर थाएक जून की रोटी को तरसा मेरे देश का मजदूर थाचंहु ओर हरियाली की देखो एक चादर सी फैली...
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ललित शर्मा
कविता
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[30 Apr 2010 19:47 PM]



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