उत्तरों में प्रश्न बुनता , अधीर कहलाता हूँ .
विपत्त्तियों की सम्पदा कमर तोड़ कर जुटाई है ,दुविधाओं की भेंट जो पग पग पर पायी है, आशा की पोटली में उनको संजो पाता हूँ ,उत्तरों में प्रश्न बुनता , अधीर कहलाता हूँ .पहर के निनाद रुई के फाहों से ढांपता ,सत्य का गला घोंटते ह्रदय में कांपतामन के...
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narendra pant
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[30 Apr 2010 16:32 PM]



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