ग्यारह साल पूरे…

satyarthmitra   लगता है कल ही की बात है जब हम थे कुआँरे निपट बेचारे फिर बारात सजाकर गये थे दूल्हा बने सबने नाच-नाच कर जश्न मनाया ससुरालियों ने हमें खूब बनाया लेकिन हमें खूब भाया रचना से सृजन सुनहरा दौर शुरू हुआ पहले बेटी, फिर बेटा वागीशा, सत्यार्थ उसके बाद... [पूरी पोस्ट]
writer सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी

सत्यार्थ

views
49
upvote
6
downvote
0
rating
6
comments
23
[30 Apr 2010 14:34 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix