ग्यारह साल पूरे…
लगता है कल ही की बात है जब हम थे कुआँरे निपट बेचारे फिर बारात सजाकर गये थे दूल्हा बने सबने नाच-नाच कर जश्न मनाया ससुरालियों ने हमें खूब बनाया लेकिन हमें खूब भाया रचना से सृजन सुनहरा दौर शुरू हुआ पहले बेटी, फिर बेटा वागीशा, सत्यार्थ उसके बाद...
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सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
सत्यार्थ
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[30 Apr 2010 14:34 PM]



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