मैं था जिनके इंतज़ार में............
मैं था जिनके इंतज़ार मेंख़्वाबों का दिए जलाये हो गए वो किसी और के बिना अश्कों में आग लगाये....सावन की बूंदों में गिरता रहामेरा ये अश्क लहू बनके मुस्कुराते रहे वो उनकी बाँहों मेंबिना शर्मों-हया शाजाये...... बैठा रहा मैं उनकी आश में, मिलन की...
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Tej Pratap Singh
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[30 Apr 2010 13:31 PM]



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