मेरी किस्मत और मेरा चांद..
मेरी किस्मत और मेरा चांदमुझसे खेल रहे थे लुकाछिपी का खेलमेरा चांद मेरे क़रीब आकर भी दूर हो जाताऔर मेरी किस्मत मुझे ठेंगा दिखा जाती।चौदहवीं की रौशनी में चमकने के बावजूदनजूमी के पन्नों में दमकने के बावजूददूरियों का दायरा...चांद और किस्मत के दरम्यान और बढ़...
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अबयज़ ख़ान
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[30 Apr 2010 12:32 PM]



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