मानवता सिखलाएं
बिल्ली कहती म्याऊँ-म्याऊँरुक जा चूहे अब मैं आऊँतुझको मैं खा जाऊँगी अपनी भूख मिटाऊँगीफिर जल्दी से पेड़ पे चढ़केचुपके से सो जाऊँगीचूहा बोला बिल्ली मौसीतुम तो कितनी प्यारी होहमको खाकर क्या पाओगीतुम तो राजदुलारी होहमें मारकर पछताओगीवापस घर कैसे जाओगीजिस राह से...
[पूरी पोस्ट]
रवीन्द्र गोयल्
सच कम्युनिकेशन
4
0
0
0
0
[28 Apr 2010 01:05 AM]



Shuffle








