फुलकारी

RAVINDRA GOYAL हर वक्त मुनासिब होता हैमंज़र मनमाफ़िक होता हैबढ़ने वाले कब रुकते हैंमुश्किल जीवन का सौदा हैसुख पल दो पल का धोखा हैजो उठता है और लडता है ये वक्त उसी का होता हैलक्ष्य वही हासिल करता हैजो पहला कदम बढ़ता हैडरपोक किनारे रहता हैतैराक नदी तर जाता हैदिल बाग-बाग हो... [पूरी पोस्ट]
writer रवीन्द्र गोयल्

सच कम्युनिकेशन

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[28 Apr 2010 01:03 AM]

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