सच्ची मुच्ची उनकी मुट्ठियाँ बन्द ही थीं

नन्हा मन  सुबह की बातों में हो गयी शाम  मैं कुछ ही पलों में लौटा, नन्हें मुन्ने बच्चे इँतज़ार जो कर रहे थे, सच्ची मुच्ची में उन सबकी मुट्ठियाँ बन्द ही थीं । आते ही मैंने लम्बी तान लगाई.. मछली जल की रानी है  जीवन उसका पानी है हाथ लगाओ, डर जायेगी बाहर... [पूरी पोस्ट]
writer डा. अमर कुमार
views
16
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
4
[30 Apr 2010 12:12 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix