सच्ची मुच्ची उनकी मुट्ठियाँ बन्द ही थीं
सुबह की बातों में हो गयी शाम मैं कुछ ही पलों में लौटा, नन्हें मुन्ने बच्चे इँतज़ार जो कर रहे थे, सच्ची मुच्ची में उन सबकी मुट्ठियाँ बन्द ही थीं । आते ही मैंने लम्बी तान लगाई.. मछली जल की रानी है जीवन उसका पानी है हाथ लगाओ, डर जायेगी बाहर...
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डा. अमर कुमार
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[30 Apr 2010 12:12 PM]



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