हाँ.... ये भी सच है

abhivyakti डूबता हुआ सूरज सूखी हुई नदीपिघलते पर्वत उजड़ता जंगल अब सब अपने से ही लगते है ....हाँ.... ये भी सच है कि इन अपनों से पहलेसपनो वाली एक दुनिया मेंसलाम किया करती थी मैं भी उगते सूरज को संग बह लेता था मेरा भी मन...कल कल करती... [पूरी पोस्ट]
writer himani
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[30 Apr 2010 09:30 AM]

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