सिर्फ़ प्यार कर
मैंने तो दिल की गहराइयों से चाहा तुमको, और तुमने मेरी चाहत को सस्ता समझा मेरी भावनाओं से खेल कर क्या मिला तुमको? प्यार को तुमने क्यों खिलवाड़ समझा? तुमने अभी तक मेरे प्यार की नम्रता देखी है, अब तुम उसकी कठोरता भी देखोगे, नारी प्यार में मिट [...]...
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ramadwivedi
संवेदना की अनुभूतियक्षणिकाएँsirf pyaar kar
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[30 Apr 2010 07:19 AM]



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