देश व समाज के प्रति लेखकों की चिंता घटीः अरुण कमल

जनशब्द समकालीन साहित्यिक तथा सामाजिक परिदृश्य विषय पर विचार-गोष्ठीदेश और समाज के प्रति लेखकों की चिंता घटी है। पहले लेखक सांप्रदायिकता, हत्या, बलात्कार, मंहगाई, बेरोजगारी के खिलाफ सड़क पर उतरते थे लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। वहीं ऐसे विषयों पर लेखकों के बयान... [पूरी पोस्ट]
writer अरविन्द श्रीवास्तव
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[30 Apr 2010 07:16 AM]

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