ख़्वबों से थक जाएं पलकें

युग-विमर्श  (YUG -VIMARSH)   یگ ومرش ख़्वबों से थक जाएं पलकें।कितना बोझ उठाएं पलकें॥ दिल की तमन्ना बर आने पर, झूमें नाचें गाएं पलकें॥मातम है एहसास के घर में, बच्चे आँसू माएं पलकें॥झपक झपक कर दिखलाती हैं, कैसी शोख़ अदाएं पलकें॥आधी आधी जब खुलती हैं , एक क़यामत ढाएं पलकें॥दिल रंजीदा आँखें... [पूरी पोस्ट]
writer युग-विमर्श
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[30 Apr 2010 06:11 AM]

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