ईश्वर प्रदत्त जीवन पद्दति सिर्फ और सिर्फ एक ही है प्राणिमात्र का कल्याण करते हुए उस परमात्मा का ध्यान करना
किसी चीज को समझने के लिए काफी अन्दर जाना पड़ता है. और ना समझना हो तो अपने खोखले दिमाग से कुछ भी कहा जा सकता है किसी भी धर्मग्रन्थ की,उपासना पद्दति की बुराई की जा सकती है. क्योंकि बुद्धि तो हमारी है ना. कुछ लोग वेद और उनके विस्तार रूप...
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Amit Sharma
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[30 Apr 2010 06:07 AM]



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