भागना परछाइयों के पीछे-पीछे…

aradhana-आराधना का ब्लॉग छुटपन में, जब पेड़ों की परछाइयाँ धूप से लड़ते-लड़ते, शाम को थककर ज़मीन पर पसर जाती थीं, तो हम उनकी फुनगियों पर उछल-कूद मचाते थे और कहते थे “देखो, हम पेड़ की फुनगी पर हैं”—बचपन कितना मासूम होता है, परछाइयों से खेलकर खुश हो लेता है. पर,... [पूरी पोस्ट]
writer aradhana

यादेंबचपनबातेंअम्‍मां

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[30 Apr 2010 05:09 AM]

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