संवेदना दिखाने को संवेदनहीन होते लोग,(कविता), (वयंग्य)
संवेदना दिखाने को संवेदनहीन होते लोग,दुसरो को जगाने के लिए अपने होश खोते लोग!हाँ मै अभी जिन्दा हूँ,बस यही बताने के लिएजिंदगी को ढोते लोग!ओरो की नींद उड़ा,खुद चैन से सोने के सपने संजोते लोग!भगवान् ने इंसान बनायवो ही अबहिन्दू-मुस्लिम होते लोग!हथियार उठा जो...
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kunwarji's
(वयंग्य)
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[30 Apr 2010 04:44 AM]



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