अभिसारिका बिन कैसा मिलन
अभिसारिका बिन कैसा मिलनकैसी मिलन की यामिनीकब तक रचूँ शब्द देहकब तक कल्पित अभिसार करूँकब तक रचूँ मूर्ति कल्पना कीकब तक रचूँ कंचन कामिनीअभिसारिका बिन कैसा मिलनकैसी मिलन की यामिनीकैसी सुहानी रात है यहकैसी धवल है चाँदनीमन वीणा के तार कह रहेछेड़े कोई आकर रति...
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डॉ. राजेश नीरव
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[30 Apr 2010 04:29 AM]



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