२८ साल
उम्र के इस पड़ाव में,जब आपकी जी हुई ज़िन्दगी दुनियाँ के लिए 'कुछ नहीं' सी है,बेशक दुनियाँ से आपको (कम के कम इस वक्त तक तो) कोई सरोकार नहीं (था).तब बैठ जाते हैं,एकांत में आप.ये अंतस का एकांत...अनेक के बीच स्वेच्छा का एकांत...(सनद रहे, स्वेच्छाएं अत्यंत...
[पूरी पोस्ट]
दर्पण साह 'दर्शन'
48
4
0
4
25
[30 Apr 2010 03:21 AM]



Shuffle








