और हम इंतज़ार करते हैं
हर सुबह की शाम होती है ,
और हम इंतज़ार करते हैं .
बदलते हैं रुख मौसमों के ,
और हम इंतज़ार करते हैं .
मौत का एक दिन मुकम्मल है ,
और हम इंतज़ार करते हैं .
गया वक़्त लौट कर नहीं आता ,
और हम इंतज़ार करते हैं .
हर चेहरा एक मुखौटा है ,
और हम इंतज़ार करते हैं...
[पूरी पोस्ट]
अतुल प्रकाश त्रिवेदी/ અતુલ પ્રકાશ ત્રિવેદી
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[30 Apr 2010 03:25 AM]



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