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इन दिनो कुछ अजीब आलमप्यार की राह देखती हूं मैंज़िंदगी की तलाश में शब भरचांद तारों से बातें करती हूंप्यार, इक़रार और वफ़ा हमदमसबके मानी तलाशती हूं मैंज़ेहन में उल्झनों का दफ़्तर हैरात आंखों में काटती हूं मैंजिसको पाना था उसको पा तो गईफिर भी तन्हाईयों में...
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Razi Shahab
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[30 Apr 2010 02:23 AM]



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