कौन है जो कहकहे सब बटोर कर ले गया

कच्‍चा चिट्ठा बनने का बड़ा शोर था कैसे खामोशी से ढह गया। कौन है जो कहकहे सब बटोर कर ले गयाइतने नादॉं तो न थे हम फिर क्यों रवानी में बहते रहे। आशियॉं जलाया किसी ने हम तो बस सुलगते रहे।वो तुनकमिजाजी, कॉफी की महफिलेंदेर से आना बनाकर बहानाचले थे साथ हम जो दो कदम बस वही... [पूरी पोस्ट]
writer मथुरा कलौनी

कविता

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[30 Apr 2010 01:24 AM]

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