एक हुस्न की तारीफ में शब्द पड़ रहे हैं कम
जब शब्द न हों हुस्न की खूबसूरती बयां करने के लिए तो दिल कुछ ऐसा कहता है।एक हुस्न की तारीफ में शब्द पड़ रहे हैं कम,जिनसे मिलने की जुस्तजू हर पल कर रहे हैं हम।दिलों को लूट लेना उनका शौक सा लगता है,दिल लुटा देना हमने भी सीख रखा है।वह लुफ्त लेते हैं हमको दर्द...
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पियूष अग्रवाल
कविता
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[30 Apr 2010 01:03 AM]



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