कबीरदास जी के दोहे-मनुष्य की खोपड़ी उल्टा काम करती है (mind of men-kabir sandesh)
कबीरा औंधी खोपड़ी, कबहूं धापै नाहिंतीन लोक की सम्पदा, कब आवै घर माहिंसंत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि मनुष्य की खोपड़ी उल्टी होती है क्योंकि वह कभी भी धन प्राप्ति से थकता नहीं है। वह अपना पूरा जीवन इस आशा में नष्ट कर देता है कि तीनों लोकों की संपदा...
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दीपक भारतदीप
आध्यात्म
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[29 Apr 2010 23:34 PM]



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