पसंद, नापसंद का चटका------एक यह भी सोच

कुछ इधर से  ,कुछ उधर  से हमारे बुजुर्ग कहा करते थे-- बेटे! एक बात सुन लो,लड़की देखने तो जा रहे हो, पर कान खोल कर सुन लो की लड़की पसंद करके ही आना,नापसंद ना करना.चाचा जी,अगर सिर्फ पसंद ही करनी है, पसंद ना आने पर भी नापसंद नहीं कर सकते,तो फिर देखने की जरुरत ही क्या है.नहीं बेटे,ज़रा... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक गर्ग
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[29 Apr 2010 21:59 PM]

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