बुनियाद नहीं बदलती…… : रश्मि प्रभा
अपने सुकून के लिए समुद्र मंथन मत करो हर बार अमृत नहीं निकलता और गर निकल भी जाए तो उसे असुरों को समर्पित करना तुम्हारी विशालता नहीं कायरता है ! तुम अच्छी तरह जानते हो ढाँचे के क्षणिक रद्दोबदल से बुनियाद नहीं बदलती !...
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Rashmi Prabha
कविताkavitaसाहित्यFeatured
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[29 Apr 2010 17:22 PM]



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