उधार-गाथा
कुछ समय के वास्ते चाहिए मुझको तुम्हारी 'जमा पूँजी'जो तुम्हे देती रही नेपथ्य से — संकल्प दृढ़ता.मन में उठी एक चाह को 'पक्का इरादा में बदलने की सनक.प्राप्त करके जमा राशि तुम्हारी मिल ना पाती मन को तुम्हारी भाँति 'दृढ़ता'.ज़रुरत भी एक होती पूर्ण दिखती दूसरी...
[पूरी पोस्ट]
PRATUL
12
0
0
0
3
[29 Apr 2010 15:19 PM]



Shuffle








