पड़ोसी :मानस खत्री की हास्य कविता

www.vicharmimansa.com सुबह होते ही मुँह उठाये चले आते हैं, मुफ्त की चाय पी जाते हैं. कपडा धोने के लिए तो "सर्फ" भी नहीं लाते हैं, हर रविवार को एक मुट्ठी मांग ले जाते हैं, हमारे भी हैं पड़ोसी एक, विचारों के हैं वो बहुत ही नेक. हमसे कुछ मांगने की जगह हमें ही दे जाते हैं, ज़रूरत... [पूरी पोस्ट]
writer manasfaizabad

व्यंगकवितासाहित्‍यFeatured

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[29 Apr 2010 11:42 AM]

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