अधूरी कविता- शोभना 'शुभि'
आज बैठे बैठे ऐसे ही कुछ पंक्तियाँ लिख दी आगे कुछ सुझा नहीं, बस ये चार पंक्ति लिख पाई कभी खुद से मुलाकात करनी हो तो तन्हाई में डूब कर देखो कभी खुद को सुकून देना हो तो खुद की परछाई से लड़कर देखोकभी खुद को ऊंचाई पर पाना हो तो सपनों को बुनना सीखोकभी...
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Shobhna Choudhary
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[29 Apr 2010 11:24 AM]



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