और वे सत्संग में चली गयी ---- लघुकथा

यूरेका वे बेचैनी से कमरे में टहल रहीं थी. अभी तक फोन क्यों नहीं आया? पता नहीं प्रबन्ध हुआ कि नहीं. "बेटा तीन साल से फेल हो रहा है. चिंता हो किसी को तब न. अबकी तो कुछ भी करके पास करवाना ही होगा." ट्रिंग -- ट्रिंग "हलो, क्या हुआ?" "हो... [पूरी पोस्ट]
writer M VERMA
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[29 Apr 2010 09:47 AM]

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