निगाहों में तेरी सूरत ..!!

के.सी.वर्मा आज भी तेरी प्यारी सूरत निगाहों में बसी है ,लगाई थी जो प्यार की मेहंदी , हाथों में रची है ! सुर्ख होठों पर सजी मोहक सी मुस्कान तेरी ,लगे ऐसे गुलाबों में लड़ी, मोती की फंसी है ! जो भी देखे तेरी उडती ,जुल्फों का नजारा , लगे बदली बादलों की, लहरों में फंसी है... [पूरी पोस्ट]
writer कमलेश वर्मा

निगाहें

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[29 Apr 2010 09:28 AM]

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