जब भी कुछ फ़ुर्तसत होती है
जब भी कुछ फ़ुर्तसत होती है। तनहाई नेमत होती है।शायर कोई और है मुझ में, पर मेरी शुहरत होती है॥उर्दू के शेरों में बेहद, तरसीली क़ूवत होती है॥लफ़्ज़ों के जादू में पिनहाँ, मानी की ताक़त होती है॥वादा-ख़िलाफ़ी करते क्यों हो, दोस्ती बे-हुरमत होती है॥वो अदना...
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[29 Apr 2010 09:17 AM]



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