रावण के जन्म की कथा - उत्तरकाण्ड (2)

संक्षिप्त वाल्मीकि रामायण अगस्त्य मुनि ने कहना जारी रखा, "पिता की आज्ञा पाकर कैकसी विश्रवा के पास गई और उन्हें अपने अभिप्राय से अवगत कराया। उस समय भयंकर आँधी चल रही थी। आकाश में मेघ गरज रहे थे। कैकसी का अभिप्राय जानकर विश्रवा ने कहा कि भद्रे! तुम इस कुबेला में आई हो। मैं तुम्हारी... [पूरी पोस्ट]
writer जी.के. अवधिया
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[29 Apr 2010 08:32 AM]

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