लिखने से क्या होगा हासिल
सम्भव तो था लिख देता मैं गीत नये नित दस या बारहप्रश्न उठा लेकिन यह मन में, लिखने से क्या होगा हासिलअक्षर चार वाहवाही के, और शब्द कुछ " खूब लिखा है ""अद्भुत है","उपमायें अनूठीं""शिल्प रचा है तुमने सुन्दर"भावों की कड़ियां गूंथी हैं सुघड़ तरीके से माला...
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राकेश खंडेलवाल
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[29 Apr 2010 07:55 AM]



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