स्वप्न दिवास्वप्न और दु:स्वप्न
'स्वप्न देखो और बड़े स्वप्न देखो' यह सलाह बहुत दी जा रही है। और यह अच्छी लगती भी है क्योंकि मनवांछित स्वप्न देखने का अपना सुख है। जनतंत्र में तो स्वप्न दिखाए जाते हैं, रंगीन और स्वर्गिक ! नए नए स्वप्न दिखाए जाते हैं, पुराने किसको याद रहते हैं, इस जानकारी...
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विश्व मोहन तिवारी
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[29 Apr 2010 01:20 AM]



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