इस तरह कहानी बन जाती

नई क़लम  - उभरते हस्ताक्षर किस्मत की भूल सुधर जाती , जीने का अर्थ निकल आताइस तरह कहानी बन जाती, कुछ तुम कहती कुछ मैं कहता।तुम आये थे खुशियाँ लेकर, दिल बैठा सौ ग़म लेकर तुमने हँसना सिखलाया था, इस दिल को नया जनम देकरमैं उम्र बिता देता यूँ ही, तुम मुस्काती मैं हंस लेता।इस तरह कहानी... [पूरी पोस्ट]
writer नई कलम - उभरते हस्ताक्षर
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[28 Apr 2010 23:56 PM]

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