दो बजिया बैराग्य पार्ट फोर
मैंने कभी भी पापाजी को गुस्से में चीखते-चिल्लाते नहीं देखा है.. वह भी एक आम इंसान हैं, और किसी और कि तरह गुस्साते भी हैं.. मगर घर में उनके गुस्से को ऊँची आवाज कभी नहीं मिली.. उनका चुप रह जाना ही अपने आप में सब कह जाता था.. जब तक इतनी समझ नहीं आयी थी कि...
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[28 Apr 2010 16:03 PM]



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