फ्रिज में रखा हुआ सुख...
किसी कविता का फिर से पढ़ा जाना जो सुख की गुदगुदी पैदा करता है वह उसका पहली बार पढ़ा जाना नहीं करता है। पहली बार का आश्चर्य होता है। दूसरी बार में अपनापन शामिल रहता है। मैं भी बड़े अपनेपन से अपनी कुछ कविताए दुबारा पढ़ता हूँ। दौबारा वही सुख, उसी अपनेपन की...
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मानव
अपने से...
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[28 Apr 2010 15:21 PM]



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