गीत
मन दुखी है तन सुखी है ,कैसा है यह खेल ?यह जीवन है या फिर सारे जीवन की है जेल. रटते रट ते ,बारह खाड़ियाँ ,भूल गए सारी बातें ,भूल गए सब चंदा तारे ,भूल गए गहरी रातें ,अब तो बस मुर्दा चामों की ढोल बजाना बचा रहा कब तक जागे चाँद पे...
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डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह
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[28 Apr 2010 14:11 PM]



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