पटरियां
हम पटरियां है दरअसल जो कभी नहीं मिलतींपर हमेशा साथ-साथ ही चलती हैं। यही उनकी नियति बन चुकी है कि साथ होके भी बहुत दूर रहना है। वो मिलना भी बहुत चाहती हैं ;दूर से लोगों को मिलती हुई महसूस भी होती हैं पर चाहकर भी वो नहीं छू सकती हैं एक दूसरे कोक्यूंकि वो...
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कौशलेन्द्र
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[28 Apr 2010 13:56 PM]



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