ख्वाहिश - एक और ग़जल

Voice Of Heart : पुकार - अंतर्मन की मुझे कुछ इस कदर नशा सा हो गया है ग़जल लिखने का की बस हाथ थमते ही नहीं... लीजिये पेश ए खिदमत है एक और ग़जल .. दिल के बेहद करीब.. :)  तुझ से मिलने की जब कभी भी ख्वाहिश की थी,मजबूरियों ने तब कुछ रुकने की फरमाइश की थी.इक दफा फिर से तेरी यादों ने रुलाया... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु पन्त
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[28 Apr 2010 13:08 PM]

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