॥ अगर भौजाई लाओ॥
(मुंडारी लोकगीत का काव्यांतर : तेरह)हे भइया, अगर भौजाई लाओतो खाते-पीते घर से ही लानाजहां शुद्ध हंड़िया पी जाती होआचार-विचार अच्छे होंमान-मर्यादा अच्छी हो।यह कैसे मुमकिन है भाई,हम तो बिन मां के- अनाथ हैंकैसे मिलेगा ऐसा घरहमारे पिता भी नहीं- अनाथ हैं!...
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अरविन्द चतुर्वेद
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[28 Apr 2010 10:55 AM]



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